एक समय की बात है, गांव में एक हँसी-मजाक का महौल बना हुआ था। एक दिन, एक अजीब सा छोटा सा बंदर अपने दोस्तों के साथ एक नई शरारत सोच रहा था। बंदर ने सोचा, "चलो आज हम गांववालों को एक अच्छी सीख सिखाते हैं!" बंदर और उसके दोस्त एक समय के लिए छुट्टी लेकर गांव के पास एक झील की ओर गए। वहाँ पहुंचकर, बंदर ने एक बड़ा सा नामकिन मुर्गा ढूंढा। बंदर अपने दोस्तों से बोला, "देखो, यह मुर्गा अच्छा है, पर उसकी अजीब आवाज और चाल को देखकर हम उसे लोगों के सामने प्रदर्शन करेंगे।" बंदर ने मुर्गे को पकड़ लिया और उसकी आवाज मिमिक करने लगा। मुर्गा "मैं हाँ-हाँ" कहकर चलने लगा। लोगों ने इस अजीब दृश्य को देखकर हैरानी से देखा। गांव के सबसे बड़े बुजुर्ग ने पूछा, "यह मुर्गा इतनी अजीब आवाज में क्यों बोल रहा है?" बंदर ने मुस्कराते हुए कहा, "आज तक सब मुझसे पूछते रहते हैं, 'तू बंदर है, तो बोल क्यों नहीं सकता?' तो मैंने सोचा, क्यों न कोई और बोले?" लोग हंसते हंसते गुस्से में आ गए, लेकिन फिर उनको भी हंसी आ गई। इस हंसी-मजाक भरे दृश्य ने सभी को मनोरंजन पूर्ण अनुभव किया और सबकी चेहरे पर हंसी लेकर गया।