**एक बुढ़िया की दिल छू लेने वाली कहानी**
किसी गांव में एक बुढ़िया रहती थी, जिनका नाम 'सरिता' था। सरिता की जिंदगी बेहद कठिन थी, लेकिन वह हमेशा मुस्कराती रहती थी।
सरिता का सबसे अच्छा दोस्त एक बच्चा था, जिसका नाम 'रवि' था। वे हमेशा साथ खेलते और वक्त बिताते थे। एक दिन, रवि की माँ गांव को छोड़कर अन्य शहर में काम करने चली गई। इसके परिणामस्वरूप, रवि गांव छोड़कर चला गया और सरिता अकेली हो गई।
सरिता के लिए दिन बेहद अकेले और उदास बितने लगे। वह रोज़ रवि का आना इंतजार करती, लेकिन रवि की अभी तक वापस आने का समय नहीं आया था।
फिर एक दिन, सरिता ने गांव के बच्चों के साथ खेलते हुए एक वृक्ष के नीचे बदल में सोते हुए एक भिखारी को देखा। उसका दिल दुखा, और उसने भिखारी के पास जाकर अपना खाने का भाग दिया।
उसके बाद से, सरिता ने हर दिन भिखारियों के साथ अपना खाने का भाग बाँटना शुरू किया। वह गरीबों के लिए अपना सारा समय देने लगी और वह मुस्कराती रहती, भले ही उसकी जिंदगी में कितनी भीड़ हो।
एक दिन, जब सरिता अपनी आवासीय गली में वापस आ रही थी, वह रवि को देख खुशी खुशी दौड़ी और उसे गले लगा लिया। रवि वापस गांव आया था, और उसकी माँ ने गांव में काम करके अच्छे पैसे कमाए थे।
सरिता ने रवि को अपनी नई मित्रों के साथ मिलाया और वह दोनों खुशी-खुशी खेलने लगे।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि जब हम दूसरों की मदद करते हैं और उनकी मुश्किलों में साथी बनते हैं, तो हम खुद भी सुखी होते हैं। सरिता ने अपनी आवश्यकताओं के बावजूद दूसरों के लिए समय निकाला और अपने जीवन को साझा किया, जिससे उसका दिल हमेशा खुश रहा। By---

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